जिला अस्पताल में खाद्य पदार्थ व लेखन सामग्री के साथ ही अन्य सामानों की आपूर्ति में भी भारी घोटाला सामने आया है। बल्ब, पंखा व बैटरी के अलावा सर्फ, साबुन व झाड़ू का जो रेट विभागीय अधिकारी ने स्वीकृत किया है, वह बाजार रेट से कई गुना अधिक है। चूंकि अनियमितता सामने आने के बाद डीएम ने बकायदा कमेटी गठित करते हुए जांच कराने की बात कही है, साथ ही पुराने अनुबंध को खत्म करने का निर्देश दिया है, लिहाजा उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द ही कई और खुलासे सामने आ सकते हैं।
मनीष कंस्ट्रक्शन नाम की जिस फर्म के रेट चार्ट को मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अप्रूव किया है, उसे देखने के बाद यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में सामानों की आपूर्ति के नाम पर भी किस प्रकार सरकारी धन के लूट की कोशिश की गयी है। खास बात यह कि ऐसे सामान, जिसकी कीमत जगजाहिर है, उसके दाम भी कई गुना बढ़ाकर लिखे गए हैं और विभागीय अधिकारी ने बिना किसी जांच-पड़ताल के उसपर अपना दस्तखत बना दिया है।
उदाहरण के तौर पर देखें तो सूची में ऑल आउट मशीन की कीमत 230 रुपये व रिफिल की कीमत 105 रुपये दर्ज है। जबकि बाजार में मशीन व रिफिल दोनों एक साथ 70 से 90 रुपये में आसानी से उपलब्ध है। और तो और टॉर्च की बैटरी, बिम पाउडर, डस्टबिन व डोर मैट (पायदान) जैसे छोटे-छोटे सामानों के जरिए भी अधिकारियों के साथ मिलकर फर्म ने मनमाना रेट पर आपूर्ति की है।
सामान जितना बड़ा व कीमती है, मूल्य का अंतर व मुनाफा भी उतना ही बड़ा है। आलमारी, टेबल, कुर्सी आदि के नाम पर बड़ा खेल सूची में नजर आ रहा है। जैसे ट्यूबलर बैटरी बाजार में 12 से 13 हजार रुपये में मिल रही है, जबकि सूची में इसकी कीमत 25 हजार 300 रुपये लिखा गया है। इसी प्रकार बड़ी आलमारी की दर सूची में 23 हजार 700 रुपये दर्ज है। खास बात यह कि कम्पनी का कोई जिक्र नहीं है। बाजार में 6 से 10 हजार में बड़ी आलमारी कहीं भी खरीदी जा सकती है।
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