परिवहन मंत्री के जिले में यातायात व्यवस्थाएं बुरी तरह चरमराई !

प्रदेश के परिवहन मंत्री के गृह जिले बलिया में यातायात व्यवस्थाएं बुरी तरह चरमराई हुई हैं। रोडवेज बसें खस्ताहाल हालात में हैं ऊपर से बस चालक किसी भी तरह के यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। चालक बिना सीट बेल्ट के ही वाहन चला रहे हैं और खुद के साथ यात्रियों की जिंदगी से भी खिलवाड़ कर रहे हैं।

आमतौर पर बिना सीट बेल्ट के चलने वालों प्राइवेट वाहन चालकों के खिलाफ पुलिस व परिवहन विभाग जुर्माना वसूलने की कार्यवाही करता है। लेकिन उनका जोर रोडवेज बस चालकों पर नहीं चलता। यू तो परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा सप्ताह और सड़क सुरक्षा माह के तहत लोगों को जागरुक करने अभियान चलाता है। लेकिन इसका असर धरातल पर नहीं दिखता।

खुद परिवहन विभाग की बसों के चालक ही नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिले में रोडवेज डिपो में जनरथ समेत 80 बसों का बेड़ा है। बसों के साथ ही अन्य चार पहिया वाहनों को चलाते समय ड्राइवर को सीट बेल्ट लगाना जरूरी है। ऐसा न करने पर जुर्माने की कार्यवाही का प्रावधान है। ऐसे में प्राइवेट वाहन चालक तो नियमों का पालन करते हैं। लेकिन रोडवेज बस चालक इन नियमों का पालन नहीं करते।

बता दें कि साल 2018 में सभी बसों में सीट बेल्ट लगाया गया था। इसके साथ ही बसों में फायर एक्सग्यूजर और फर्स्ट एड बॉक्स की भी व्यवस्था है। एक्सपर्ट हमेशा इन्हें चेक करते हैं। फायर एक्सग्यूजर के गैस खत्म होने पर गैस भरे रिफिल लगाये जाते हैं। खाली सिलेंडर को आजमगढ़ भेजकर भरवाया जाता है। फर्स्ट एड की भी सभी बसों में व्यवस्था है। लेकिन दवा, मलहम पट्टी अक्सर नदारद ही रहती  हैं।  बसों में चालक ही सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करते। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सभी में सीट बेल्ट लगाया गया था। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। इधर परिवहन निगम की बसों में आपात स्थिति से निबटने के लिए अग्निशमन यंत्र लगे तो हैं लेकिन खराब हो चुका है। वैसे ही फर्स्ट एड बॉक्स भी है, लेकिन उसमें फर्स्ट एड की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में खरोच आदि लगने पर भी उपचार के लिए बसों में कोई व्यवस्था नहीं है।

Rashi Srivastav

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