बलिया में लाल निशान पार करने के बाद घरों में घुसा गंगा का पानी !

वाराणसी सहित पूर्वांचल में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को काशी में जलस्तर चेतावनी बिंदु के नजदीक पहुंच गया था। लेकिन बुधवार को गंगा का जलस्तर स्थिर था। वाराणसी के आसपास के जिलों में स्थिति भयानक हो गई है। बलिया में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है।

तो वहीं बलिया में डेंजर लेवल को तो गंगा पहले ही पार कर चुकी है। बलिया में गंगा मीडियम फ्लड लेवल 58.615 मी को भी पार कर सकती है।बढ़ते जलस्तर से वाराणसी सहित आसपास के जिलों में गंगा के तटवर्ती इलाकों के लोगों को घर छोड़ना पड़ रहा हैं, क्योंकि गंगा का पानी अब घरों में घुसने लगा है और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।

पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हुई जबरदस्त बारिश के चलते गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
गंगा के लाल निशान पार होते ही सड़क से दक्षिण तरफ बसे आठ गांव बाढ़ के पानी से घिर कर टापू में तब्दील हो गए हैं। पानी से किसानो की खड़ी फसल भी डूब गई है तो वहीं, पशुओं के चारे पर भी संकट खड़े हो गए हैं। चौबे छपरा के कई घरों को गंगा में अपने पेटे में समाहित कर लिया।

गंगा का जलस्तर डेंजर लेवल 57.610 को पार करने के बाद मीडियम फ्लड लेवल 58.615 मी पार करने को बेताब है। मंगलवार की शाम केंद्रीय जल आयोग गाय घाट पर 58.30 मी रिकार्ड किया गया। जबकि प्रति घंटे तीन सेमी का बढ़ाव दर्ज किया गया। गंगा ने खतरे के निशान पार करते ही क्षेत्र में तबाही मचानी शुरू कर दी है।

बलिया में पिछले दिनों से लगातार बढ़ते गंगा के जलस्तर से बाढ़ का पानी अब गांवों पर कहर बरपाने लगा है। सड़क से दक्षिण की ओर से बसे चौबे छपरा, लाला बगीचा, गंगापुर, सुघर छपरा, केहरपुर, मझौवा, गरया, बादिलपुर आदि गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर गए हैं।

गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ाव जारी रहने के कारण गांव के लोग दहशत में हैं। बाढ़ से घिरे गांव के लोगों में प्रशासनिक तैयारियों को लेकर काफी आक्रोश है। गंगा की उफनती लहरों ने अवशेष बचे चौबे छपरा में भी कहर बरपाना शुरु कर दिया है। गांव के अशोक चौबे, नर्वदेश्वर चौबे, नन्द जी यादव, लल्लू यादव के मकानों को गंगा ने अपने पेटे में समाहित कर लिया। इस गांव का अब अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है।

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