बलिया के राधेश्याम ने समान शिक्षा की मांग को लेकर फिर से शुरु किया आंदो’लन, दिल्ली में गिर’फ्तार

नई दिल्ली डेस्क : बलिया के लक्ष्मण छपरा गांव निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य व समाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम यादव ने एक बार फिर एक समान शिक्षा की मांग को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकारों के ख़िलाफ़ हल्ला बोल दिया है।

उन्होंने दिल्ली में आज से सांसदों के आवास पहुंचकर ज्ञापन सौंपने की शुरुआत की। मंगलवार को उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान पुलिस ने उन्हें उनके समर्थकों के साथ हिरासत में ले लिया। राधेश्याम पिछेले कई वर्षों से देश में एक समान शिक्षा की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

पिछले साल उन्होंने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली स्थित राहुल गांधी के आवास से अमित शाह के आवास तक दंडवत मार्च निकाला था। उस समय भी पुलिस ने उन्हें राहुल गांधी के आवास पर ही उनके बीस साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया था। राधेश्याम ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस बात की सूचना दी थी कि 22 सितंबर सुबह 11 बजे से 25 सितंबर शाम 5 बजे तक वह अपनी मांगों को लेकर सांसदों के आवास पहुंचेंगे और उन्हें ज्ञापन सौपेंगे।

अपने वादे के मुताबिक वह 22 सितंबर को जेपी नड्डा के आवास पहुंचे और उन्हें ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन इस दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हिरासत में लिए जाने से पहले राधेश्याम ने बताया कि 25 सितंबर को वह इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ज्ञापन सौपेंगे।

राधेश्याम एक समान शिक्षा की अपनी मांग को लेकर देशभर में लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वह इस सिलसिले में 4 हजार किलोमीटर से अधिक साइकिल मार्च कर चुके हैं। इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई राज्यों में दंडवत मार्च, पैदल यात्रा और साइकिल यात्रा करके मुख्यमंत्रियों को अपनी मांग का ज्ञापन सौंप चुके हैं।

राधेश्याम की मांग है कि देश में शिक्षा सबके लिए एक समान हो। नेताओं के बच्चों की तरह उन्हें वोट देने वालों के बच्चों को भी शिक्षा मिले। उन्होंने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आखिर ऐसी क्यों है कि सरकारी स्कूलों में किसान, मजदूर, रिक्शा व ठेला चालक के बच्चे पढ़ें और देश के बड़े कॉन्वेंट प्राइवेट स्कूलों में नेता, अधिकारी तथा अमीर का बच्चा पढ़े।

राधेश्याम ने मांग की है कि इस व्यवस्था को समाप्त करने के लिए सरकार संसद में एक बिल लाकर जल्द से जल्द सबको एक समान शिक्षा के लिए कानून बनाए। उनका कहना है कि जब प्रधानमंत्री का बेटा और प्रधानमंत्री के घर में साफ-सफाई करने वाले का बेटा एक समान स्कूल में पढ़ेंगे, तभी देश में समानता आएगी और देश का विकास होगा।

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