बलिया की चिलकहर विकासखंड में स्वच्छता भारत अभियान को सफल बनाने के लिए बनाए गए सार्वजनकि सुलभ शौचालय अभियान की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। जहां करोड़ों खर्च करने के बाद दर्जनों गांव में बने ज्यादातर सुलभ शौचालयों पर ताला लटका हुआ है। और कुछ व्यवस्था की कमी की वजह से इस्मेताल में ही नहीं हैं। जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जबकि सुलभ शौचालयों की सफाई के लिए हर महीने हजारों खर्च हो रहे हैं।
दरअसल नरांव, तदीपूर, कूरेजी, अमतहा पूर, पहाड़पुर, बलेसरा, अंदऊर सहित दर्जनों गांव में सार्वजनिक सुलभ शौचालय बनाए गए हैं जिसमें अधिकतर या तो ताला बंद है या फिर दूसरी व्यवस्था के कारण उसमें कोई शौच करने नहीं जाता है जबकि हकीकत यह है कि प्रत्येक गांव में स्वयं सहायता समूह की टीम को चयनित किया गया है जिसे 6 हजार रुपये हर महीने सार्वजनिक सुलभ शौचालय की साफ सफाई के लिए दिया जाता है लेकिन धरातल पर इसका दूर-दूर तक कहीं कोई असर दिख नहीं रहा है।
बंद शौचालयों की तस्वीरें कहीं ना कहीं केंद्र सरकार और राज्य सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के सपनों पर पानी फेर रही हैं। वहीं सफाई के नाम पर हर महीने खर्च होने वाले 6 हजार रुपयों का कोई हिसाब नहीं है। जिसको लेकर जब ब्लॉक के संबंधित अधिकारियों से पूछा गया तो किसी भी अधिकारी के पास इस सवाल का जवाब नहीं था।
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