बहराइच: उत्तर प्रदेश में बहराइच में बुखार, डायरिया और दूसरी बीमारियों से बीते पचास दिनों में 80 बच्चे काल के गाल में समा गए। इतनी बड़ी संख्या में मौतों पर विपक्षा बावेला लाजिमी है। जबकि मंत्री ने आरोपों को लेकर अपना संयम ताक पर रखते हुए विवादित बयान दे दिया।
उत्तर प्रदेश के श्रम व जिले के प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मामले में डॉक्टरों की तरफदारी की और व्यवस्था को मुकम्मल बताते हुए मौत के लिए परिजनों को जिम्मेदार ठहरा दिया। अंदाजा लगाइए की जिस घर का चिराग बुझ गया हो। उनके परिवार वालों पर क्या बीत रही होगी। उन्होंने कौन सा जतन नहीं किया होगा अपने लाल को बचाने के लिए। बावजूद इसके मंत्री की तोहमत ने परिजनों की भावनाओं को आहत किया है।
इलाके में स्वामी प्रसाद केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ करने पहुंचे थे। जब पत्रकारों ने जिला अस्पताल में लगातार हो रही बच्चों की मौत पर प्रतिक्रिया पूछी तो मौर्य का जवाब चौंकाने वाला निकला।
मौर्य ने तो यहां तक कहा कि परिजनों ने तत्काल अस्पताल लाने की बजाय बच्चों को झोलाछाप डॉक्टरों से दिखाया। जिसकी वजह से जान गई। मंत्री ने आरोप लगाया कि परिजन बच्चों को मरनासन्न हालत में जिला अस्पताल लाते हैं। जिन्हें बचाना डॉक्टरों के लिए मुश्किल होता है।
स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान को संवेदनहीन और गैरजिम्मेदाराना माना जा रहा है।
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