ददरी मेले में बलिया पहुचे मशहुर कवि कुमार विश्वास बलिया के लोगों का दिल जीत लिया। कोई दिवाना कहता है, कोई पागल समझता है…..इन पंक्तियों ने लगातार सर्द होती जा रही रात में ददरी मेला के भारतेंदु कला मंच के सामने बैठे करीब पचास हजार लोगों को रोमांच से भर दिया। इस पहली ही लाइन पर कवि सम्मेलन में आये श्रोताओं को महशूर कवि डॉ. कुमार विश्वास ने अपना मुरीद बना लिया।
मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कोई दिवाना कहता है, कोई पागल समझता है। मोहब्बत एक एहसासों की पावन कहानी है, कभी कबीरा दिवाना था, कभी मीरा दीवानी है। यहां बस लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आंसू हैं, जो तू न समझे तो पानी है…से श्रोताओं के दिल पर गहरी छाप शुरू में ही छोड़ी।
इसके बाद समंदर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकता….ये आंसू प्यार का मोती है, इसे खो नहीं सकता….सुनाया तो युवा दिल तेजी से धड़कने लगे। इसके बाद राष्ट्रवाद को झकझोरने का भी कुमार ने बखूबी प्रयास किया। कहा कि हम वो हैं जो शून्य में भी शून्य रचते हैं। अगली लाइन बोली….उन उजालों का यही पैगाम लेने आए हैं हम, हम हैं देसी हां, मगर हर देश में छाए हैं हम। कुमार ने मंगल पांडेय और वीर कुंवर सिंह के जरिए सामने जुटी भीड़ में जोश भरने का सफल प्रयास किया।
वहीँ प्रख्यात कवि कुमार विश्वास को सुनने के लिए भारी भीड़ जुटी थी। जो कई बार बेकाबू भी हुई। मंच पर जब भी व्यवधान पड़ा भीड़ ने हूटिंग शुरू कर दिया। पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। युवाओं के दिलों की धड़कन बन चुके मशहूर कवि कुमार विश्वास के माइक संभालने से पूर्व दिनेश बावरा जैसे कवियों ने श्रोताओं को बांधने का प्रयास जरूर किया। मगर श्रोताओं खासकर युवाओं की नजरें कुमार विश्वास को खोज रहीं थीं कि कब वो मंच पर आते हैं।
ठीक यही हुआ भी। रात के दूसरे प्रहर में ठीक एक बजे डॉ. कुमार विश्वास माइक पर आए। पत्रकारों की ओर इशारा करते हुए खुद ही अगले दिन की हेडिंग भी दी। दरअसल, खराब स्वास्थ्य के बावजूद कुमार विश्वास ने खूब रंग जमाया। जब उन्होंने कहा हमारा प्रधानमंत्री रात आठ बजे आकर यह कह दे कि भाइयों-बहनों तो सबकी हवा खराब हो जाती है। इस पर खूब ठहाके लगे।
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