निर्भया के गांव में आज भी लोग 6 साल पहले दिल्ली में उस पर हुए हमले और सामूहिक दुष्कर्म की बात को याद कर कांप उठते हैं। उस दौरान सरकार ने गांव में कन्या विद्यालय खुलवाने का वादा तो किया लेकिन वह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
बता दें कि निर्भया की मौत 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में हो गई थी। उस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव निर्भया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। अखिलेश यादव ने सरकारी मदद देने के प्रस्ताव के साथ ही यह वादा किया कि वह गांव में एक अस्पताल और इंटर कॉलेज बनवाएंगे।
‘पीएचसी में लटकता रहता है ताला’
निर्भया के दादा लालजी सिंह ने गांव से फोन पर टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया था , ‘अखिलेश ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बनवाने, एक इंटर कॉलेज और उनके परिवार के चार सदस्यों को नौकरी देने का वादा किया था लेकिन दूसरी सरकार आने के बाद भी कई कामों को अभी तक पूरा नहीं किया गया।’ यही नहीं उन्होंने यह भी कहा, ‘ स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण हो गया लेकिन वहां कोई डॉक्टर नहीं है, जिसकी वजह से स्वास्थ्य केंद्र किसी काम का नहीं है। वहां पर ज्यादातर ताला लटकता रहता है। इससे ऐसा लगता है कि जिम्मेदार विभाग अपने वादे भूल गए हैं। गांव की लड़कियों को सबसे करीब के स्कूल जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।’ लाल जी ने कहा कि सबसे करीबी हाईस्कूल गांव से तकरीबन 10 किलोमीटर की दूरी पर है।
निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, ‘इस तरह के एक आपराधिक मामले में अपराधी अभी भी जीवित हैं। यह कानून और व्यवस्था की विफलता है। हम लड़कियों को हर जगह खुद को कमजोर नहीं मानने की बात कहते हैं और माता-पिता से अपनी लड़कियों को शिक्षा से वंचित नहीं करने का अनुरोध करना चाहते हैं।’
इसी साल जुलाई के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिकाएं खारिज की थीं। मुकेश (31), पवन गुप्ता (24) और विनय शर्मा (25) की पुनर्विचार याचिकाएं खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके फैसले पर पुनर्विचार करने का कोई आधार नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई है वे उसके निर्णय में साफ तौर पर कोई भी त्रुटि सामने रखने में विफल रहे हैं। चौथे मुजरिम अक्षय कुमार सिंह (33) ने मौत की सजा के निर्णय पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर नहीं की थी।
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