जब ईओ मणि मंजरी राय ने कहा था- भईया अब याचना नहीं…. !

जब मै खामोश थी
तुमसे कुछ भी ना कहा था
ना बताया था अपना दर्द, ना
तुम्हे तुम्हारा, किस्सा ही सुनाया था

तब मैने
किताबो से वक़्त चुराकर
दुनिया कि नजरो से छुपकर
सपनो की घाटिया रची थी
और बहोत खुश थी तुम्हे
उन घाटीयो मे पाकर,
ये कवितायेँ मणि मंजरी राय ने अपने ब्लॉग में  लिखी  था जो अब इस दुनिया में नहीं रहीं

नगर निकाय मनियर अधिशाषी अधिकारी मणि मंजरी राय जोकि अब इस दुनिया में नहीं हैं. बीते दिनों उन्होंने अपने आवास पर फांसी लगाकर खु’दकुशी कर ली. यह खबर अब बलिया से निकलकर पूरी यूपी और देश भर में हो रही हैं और सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि एक तेज़ तर्रार लड़की जो आईएएस बनना चाहती थी, उसने यह कदम क्यों उठाया. ऐसी क्या मजबूरियां थी? ऐसा कौन सा दबाव था?

खैर कहा यह जा रहा है कि मनियर नगर पंचायत के कार्यपद्धति और अनियमित तौर पर खोले गये 2 करोड़ के टेंडर को लेकर मणि मंजरी रायका फी डिप्रेशन में चल रही थी. इस गड़बड़ी को लेकर वह काफी नाराज़ थी. इसलिए उन्होंने वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया था. जिसकी वजह से उन पर काफी दबाव बनाया जा रहा था.

खैर, उनके सोसाइड नोट और पुलिस की तफ्तीश से उम्मीद है कि इस मामले में जल्द ही कोई नया खुलासा होगा और कई सफेदपोश चेहरे सामने आयेंगे. लेकिन अफ़सोस यह है कि हमने एक इमानदार अफसर खो दिया.

उनके साथ पढ़ाई करने वाले पत्रकार अमीश राय ने सोशल मीडिया पर उनकी बातों को याद करते हुए लिखा है कि इतनी बहादुर अफसर बेटी को हमने खो दिया. अचानक से मणि से हुई पुरानी बातचीत याद आ गयी। इस लड़की ने BHU के लड़कियों के आंदोलन के दौरान कहा था कि भैया, अब याचना नहीं, रण होगा.

मणि मंजरी राय ब्लॉग भी लिखती थी. उनकी कविताएं आज भी उनके ब्लॉग पर मौजूद हैं. ज़िन्दगी को करीब से जीने वाले, महसूस करने वालीं और चुनौतियों का सामने करने वालीं अफसर ऐसा कदम उठाएगी, शायद ही किसी ने सोचा होगा.

ऐसे में आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि हालात वाकई में काफी दर्दनाक और परेशान करने वाले रहे होंगे कि उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.
यह है उनका ब्लॉग, जहाँ आप उनकी लिखी कविताएँ पढ़ सकते हैं.
http://khwabmanjari.blogspot.com/

बलिया ख़बर

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