बलिया। कार्तिक पूर्णिमा के पुण्य स्नान के साथ महर्षि भृगु की तपोभूमि पर उनके शिष्य दर्दर मुनि के नाम से लगने वाला ऐतिहासिक ददरी मेला शुरू हो गया। लाखों लोगों ने गंगा और तमसा के संगम में डुबकी लगाने के बाद महर्षि भृगु के दरबार में माथा टेका। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंचे। चर्खी-झूला का आनंद लिया और प्रसिद्ध जलेबी खाकर वापस घर लौटे।
कहा जाता है कि ‘या पाति योगयुक्तानां काश्यां वा मारणे रणे, सा गति स्नानमात्रेण कलौ दर्दर संगमे।। अर्थात जो पुण्य फल काशी में मृत्यु प्राप्ति और रणभूमि में वीरगति से प्राप्त होता है वही फल कलियुग में दर्दर क्षेत्र में स्नान करने से ही मिल जाता है। ऐसे में बलिया के अलावा गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, गोरखपुर, देवरिया और बिहार के छपरा, आरा, बक्सर आदि से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सोमवार की मध्यरात्रि के बाद से मंगलवार को पूरे दिन पवित्र स्नान किया
श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधा- बता दें स्नानार्थियों की सुविधा के लिए रोडवेज ने करीब 100 अतिरिक्त बसों का संचालन किया था, जबकि छपरा- वाराणसी- गाजीपुर-मऊ रेलमार्ग पर अधिसंख्य एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव भी छोटे-बड़े सभी स्टेशनों पर किया गया था। छपरा और मऊ से बलिया के लिए विशेष सवारी गाड़ियों का संचालन भी रेलवे ने किया था।
30 नवंबर को समापन- श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान के बाद महर्षि भृगु और दर्दर मुनि का दर्शन-पूजन किया। इसके साथ ही बलिया का ऐतिहासिक ददरी मेला भी शुरू हो गया। मेला का समापन 30 नवंबर को होगा। इस दौरान दंगल, अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन, मुशायरा, कव्वाली, लोकगीत व ददरी महोत्सव का आयोजन होगा।
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