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हजरत अली (र.अ.) के मुताबिक़ बेवफा औरत कि ये पहचान है ?देखिये विडियो

आज के इस पोस्ट में हम आपसे हज़रत अली (र.अ.) के हवाले से उनकी उनकी ज़िन्दगी में पेश आने वाले कुछ वाक्यात पेश करेंगे . हज़रत अली (र.अ.) के हवाले से आपको बता दें कि उनको शेर ए खुदा कहा जाता है . हज़रत अली (र.अ.) हज़रत मुहम्मद (स.अ.) के चचा हज़रत अबू तालिब के बेटे थे . बचपन से ही हज़रात मुहम्मद (स.अ.) के साथ रहते थे और 8 साल कि उम्र में उन्होंने इस्लाम कुबूल किया था . पहला वाक्य जो हम आज आपको बताने जारहे है वो बेवफा औरत कि पहचान के हवाले से है .

हज़रत अली (र.अ.) के पास एक शख्स आया और उनकी खिदमत में कहने लगा कि मैं किसी को पसंद करता हूँ और उससे मैं शादी करना चाहता हूँ लेकिन मेरे ज़ेहन में एक सवाल है कि क्या वो मेरे लिए एक वफादार बीवी साबित होगी ? सवाल का जवाब देते हुए हज़रत अली (र.अ.) ने कहा ” ऐ शख्स याद रखना जो औरत अपने वालिदैन की तौहीन करती है और अपने उस्ताद का एहतराम ना करती हो और अपने गहर की शिकायत करती हो तो समझ जाना वो औरत एक वफादार बीवी साबित नहीं होगी .

औरत को औरत इसलिए कहा जाता है कि इसके वोजूद में छुपना छुपाना है और जो औरत अपने घर के ऐब बाहर बयान करे तो समझ जाना कि आने वाले वक़्त में ये औरत तुम्हारे ऐब को दूसरों से बयान करेगी . इसके बाद सवाल पूछने वाले शख्स ने कहा हज़रत अली (र.अ.) मुझे कोई ऐसी दुआ बताये जिसे पढ़ कर वो इंसान वाज़े हो जाए. जवाब में हज़रत अली (र.अ.) ने फ़रमाया ए शख्स ज़मीन में से सबसे बदतरीन अमल झूठ है सभी गुनाहों कि जड़ है याद रखना जिस औरत के अमल में झूठ हो, फरेब हो और मुनाफिकत हो वो औरत कभी किसी से वफ़ा नहीं कर सकती .

हज़रत अली (र.अ.) के हवाले से एक और वाकया :
हज़रत अली (र.अ.) हुए थे कि उनके पास एक फ़कीर आता है और कहता है अल्लाह के नाम मुझे कुछ देदे, ये सुनते ही हज़रत अली (र.अ.) अपने बेटे हजरत हसन (र.अ.) से कहते है घर जाओ और अपने वाल्दा से पूछो कि घर पर क्या है ?
उनकी वाल्दा उनको जवाब जवाब देती है कि घर में 6 दिरहम मौजूद है यानी कि हज़रत फातिमा (र.अ) अपने बेटे हज़रत हसन (र.अ.)से कहती हैं कि घर में 6 दिरहम मौजूद है .

सुनते ही हज़रत हसन (र.अ) वापस जाते हैं और हज़रत अली (र.अ.) को बताते है कि घर में सिर्फ 6 दिरहम मौजूद है . हज़रत अली (र.अ.) बेटे को वापस भेजा और कहा 6 दिरहम लेते आओ . इस पर उनकी वाल्दा कहती हैं सिर्फ 6 दिरहम है और खाने का बन्दोंबस भी करना है और 6 दिरहम दे देती हैं . हज़रत हसन आते है और हज़रत अली को सब बताते है कि वाल्दा ने ये कहा . इस पर हज़रत अली (र.अ.) कहते हैं अपनी वाल्दा से कहो कि अल्लाह पर तवक्को रखे .

हज़रत अली (र.अ.) ये 6 दिरहम उस फ़कीर को दे देते हैं और बाहर निकलते है मेहनत के लिए क्यूंकि रात के खाने का भी इंतज़ाम करना होता है . वो देखते है कि यहूदी एक ऊँट लेकर जा रहा होता है वो उस यहूदी से उस ऊँट की कीमत पूछते है यहूदी जवाब देता कि अगर अभी नकद कीमत आप देंगे तो 120 दिरहम, अगर कुछ दिनों बाद देंगे तो इसकी कीमत 140 है, हज़रत अली (र.अ.) कहते है ये मुझे देदो मई तुम्हे पाच दिन बात इसकी कीमत तुम्हे दूंगा .

हज़रत अली (र.अ.) ऊँट उससे खरीद लेते है और बाज़ार कि तरफ जाते है ताकि खरीद फरोख्त हो सके . उस ऊँट कि नीलामी के लिए लोग इकठ्ठा हो जाते है . ऊँट काफी तंदुरुस्त था नीलामी 100 दिरहम से शुरू होकर 200 दिरहम तक जाती है और 200 दिरहम में हज़रत अली (र.अ.) उस ऊँट को बेच देते है और सबसे पहले उस यहूदी को 140 दिरहम देते है और घर जाकर हज़रत फातिमा (र.अ.) को 60 दिरहम देते है . 60 दिरहम देख हज़रात फातिमा हैरान रह जाती है और कहती है हमने 6 दिरहम भेजा वो भी आपने फ़कीर को देदिया और ये 60 कहा से आगये , जवब में हज़रत अली (र.अ.) कहते है कि रिज्क देने वाला अल्लाह है .आगे कुछ वाक्यात विडियो में सुने :

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