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अल्लामा इकबाल(र.अ.) से मंसूब झूठे अशआर…देखिये विडियो

अस्सलामवालैकुम दोस्तों दौरे हाज़िर की इजादात में सेल फोन भी एक कमाल की चीज़ है इसकी वजह से आप हर वक़्त अपने लोगो से राब्ते में रहते हैं आपको बता दें कि सेल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से इसके ज़रिये बहुत सी गलत फहमियां पैदा की जा रही हैं अक्सर ऐसा होता है कि किसी भी बात को बुजुर्गो की तरफ मंसूब करके लिख दिया जाता है इसमें सबसे ज्यादा अलामा इकबाल की शायरी की तादाद सबसे ज्यादा रहती है और जब कुछ लोगो के ज़रिये इसकी छानबीन की जाती है तो जिस बुज़ुर्ग की तरफ इसे मंसूब किया गया है उससे इसका कोई ताल्लुक नहीं होता है.

आपको बता दें कि हर आदमी में इतनी कुवत नहीं होती है की वो खरे और खोते को पहचान सके और कई लोग बिना सोचे समझे इस तरह के पैगामात आगे भेजते रहते हैं ज़ाहिर है कि ये नामुनासिब अमल है और इन्टरनेट ने इसे और पेचीदा बना दिया है उर्दू शायरी में अल्लामा इकबाल की हैसियत और उनके मर्तबे से कौन वाकिफ नहीं है इसकी एक वजह ये है कि लोगो में अल्लामा इकबाल की शायरी लोगो में बहुत मकबूल है.

दूसरी बात ये भी है कि आवाम में अल्लामा इकबाल को लेकर एक सोच भी है कि उनका कहा गलत नहीं हो सकता है इसीलिए अल्लामा इकबाल की शायरी इन्टरनेट पर बहुत चलन में है इनमे से कुछ ऐसे अशआर हैं जिनके पढने से दिल कुढ़ता है मगर हज़ारो गुज़ारिशो के बावजूद इन्हें तराशने वाले लोग बाज़ नहीं आते और जब हम अल्लामा इकबाल की किताबों को पढ़ते हैं तो देखते हैं कि अल्लामा इकबाल ने अपनी शायरी को कई तरीके से सजाया है.

जिसमे मर्दे-ए-मोमिन,इंसानी अजमत,हरकत ओ अमल,कौमी गैरत,हुब्बुलवतनी और खुदी का फलसफा वगैरह काफी अहम् है लोगो को इन्टरनेट पर कभी इससे ताल्लुक रखता हुआ कोई शेर नज़र आता है तो इसे हैश टैग अल्लामा इकबाल लगाकर फ़ौरन इसे शेयर का देते हैं इन्टरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया में बिल्खुसूस फेसबुक,ट्वीटर पर अल्लामा इकबाल के नाम पर बहुत सी ऐसी शायरी ..आगे देखिये विडियो.

बलिया ख़बर

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