बलिया डेस्क : पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार राणा प्रताप सिंह की मौत 13 अगस्त 2017 को हिमाचल के मंडी जिले में भूस्खलन में हो गई थी. उनके साथ साथ उनकी पत्नी और बच्चे का भी निधन इस घटना में हो गया था. इस दौरान मऊ के पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन एक्सईएन आरके प्रसाद ने बड़ा खेल कर दिया. आरके प्रसाद ने 28 लाख रुपए का भुगतान फर्जी तरीके से करा लिया और पैसा हड़प लिया था.
अब दोषी पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कार्यवाही की गयी है और उन्हें शासन की तरफ से अनिवार्य सेवानिवृति दे दी गई है. बता दें कि इस फर्जीवाड़े की जांच का आदेश सीएम ने दिया था. सीएम के आदेश के बाद मुख्य अभियंता आजमगढ़ अनुराग चतुर्वेदी ने बलिया के अधीक्षण अभियंता एके मणि को इसकी जांच सौंपी थी. इसके अलावा तत्कालीन सीओ राजकुमार ने भी इसकी जांच की थी. 2018 में आरके प्रसाद को दोषी पाया गया और उन्हें सस्पेंड करके शासन से संबद्ध कर दिया गया. उनके खिलाफ मुक़दमा भी दर्ज किया गया था.
अब उन्हें अनिवार्य सेवानिवृति दे दी गई है. इस कार्यवाही के बाद पूरे पीडब्ल्यूडी विभाग में हडकंप मचा हुआ है. बड़ी बात यह भी है कि लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता आरके प्रसाद तीन महीने के बाद ही रिटायर होने वाले थे. लेकिन इससे पहले ही उनके खिलाफ करप्शन के मामले को लेकर कार्यवाही कर दी गयी. मऊ में उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई थी.
बाद इसके आरके प्रसाद को बलिया में तैनात कर दिया गया था. इसके अलावा अधीक्षण अभियंता आशुतोष मणि का कहना है कि आरके प्रसाद के साथ साथ कुछ और अधिकारीयों के खिलाफ भी कार्यवाही की गयी है. उन्होंने उन्होंने इस मामले में स्पष्ट कुछ नहीं बताया. उनका कहना है कि सरकार ने पचास साल से अधिक उम्र के अधिकारीयों और कर्मचारियों की परफार्मेंस की समीक्षा कराई थी और इसके आधार पर भी कार्यवाही की गयी है.
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