बलिया के वीके यादव बनें रेलवे बोर्ड के चेयरमैन, जानें कैसा रहा अब तक का सफ़र

बलिया के निवासी दक्षिण मध्य रेलवे के जनरल महाप्रबंधक वी के यादव को रेलवे बोर्ड का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है. जिसके बाद जिले में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी है. बता दें की  दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक विनोद कुमार यादव रेलवे बोर्ड के नए चेयरमैन होंगे. वे  लोहानी का स्थान लेंगे जो लगभग डेढ़ वर्ष के चर्चित कार्यकाल के बाद रिटायर हो गए.कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक वी के यादव को रेलवे का अध्यक्ष नियुक्त किया है.

कौन हैं विनोद कुमार यादव

बता दें की रेलवे बोर्ड के चेयरमैन बने वीके यादव बलिया के बैरिया तहसील के सुकरौली गांव के रहने वाले हैं . बचपन से ही काफी मेधावी छात्र रहे. वह अपने संघर्ष के बल पर इस शीर्ष पद पर पहुंचे है. उनके पिता शीतल प्रसाद यादव सीडीओ आफिस में बाबू के पद कार्यरत थे. दो भाइयों में सबसे बड़े है. इनके छोटे भाई गोविंद यादव का देहांत हो चुका है.

बैरिया तहसील के सुकरौली गांव के रहने वाले इनके बड़े पिता बनवारी यादव 1974 में द्वाबा (वर्तमान में बैरिया विस क्षेत्र) के विधायक रहे. इनकी प्रारम्भिक शिक्षा प्राइमरी स्कूल से शुरू होकर गांव के नरही इंटर कालेज से हाई स्कूल की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद राजकीय इटर कालेज से उन्होंने 12 वीं की परीक्षा टॉप की. इलाहाबाद से इंजीनियरिंग के बाद अस्ट्रेलिया से से मास्टर ड्रिग्री प्राप्त की. वीके यादव 2012 में लखनऊ के डीआरएम भी रहे.

गृह जनपद में बलिया में वह प्लेटफार्म नंबर एक के विस्तार के साथ ही मालगोदाम के निर्माण के समय निरीक्षण के लिए आए थे। वह हमेशा अपने गांव से जुड़े रहे। पिछली बार चाचा की मौत पर श्राद्धकर्म में गांव आए थे.शहर के कोतवाली के सामने हरपुर मोहल्ले में इनका एक आवास भी है.  इनका पुत्र अमेरिका में कार्यरत है जबकि बेटी विवाह के बाद अपनी ससुराल में है. वीके यादव परिवार के साथ गोरखपुर में रहते है. इनका विवाह कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री रहे बलराम सिंह यादव की बेटी अर्चना यादव के साथ हुआ है।

इंडियन रेलवे सर्विस आफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स (आइआरएसईई) के 1980 बैच के अधिकारी वीके यादव का चयन सभी महाप्रबंधकों में वरिष्ठतम होने के नाते किया गया है. हालांकि रेलवे बोर्ड में कई सदस्य इस पद के दावेदार थे. जिनमें मेंबर इंजीनियरिंग विश्वेश चौबे तथा मेंबर रोलिंग स्टॉक राजेश अग्रवाल के नाम प्रमुख हैं. लेकिन योग्यता, अनुभव के अलावा पर्याप्त कार्यकाल बाकी होने के कारण यादव ने बाजी मार ली.

 

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