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दोस्त बनाने से पहले अल्लाह और उसके रसूल का ये फरमान ज़रूर जान लें …

दोस्तों दुनिया में हर इंसान का कोई ना कोई दोस्त होता इस दुनिया में कोई ऐसा इंसान नहीं होगा जिसका कोई दोस्त ना हो. हर इंसान का दोस्त होता है और दोस्त का असर भी पड़ता है दोस्तों हम जिस माहौल में रहते हैं उसका हमारे ऊपर बहुत असर पड़ता है . हम जिस तरह के माहौल में रहते हैं उसी तरह की चीज हमारे अंदर भी आ जाती है अगर हम अच्छे माहौल में रहेंगे तो हमारे अंदर अच्छी चीजें आएंगे और अगर बुरे लोगों के साथ रहेंगे तो हमारे खुद के अंदर बुरी चीज और बुरी आदतें आएँगी .

यह बात सब कोई जानता है और दुनिया में लोग अक्सर कहते रहते हैं कि संगत का असर पड़ता है संगत अच्छी होगी तो अच्छा असर पड़ेगा और बुरी होगी तो बुरा असर पड़ेगा . इसी बात को लेकर हमारे नबी रसूल अल्लाह सल्लल्लाहू वसल्लम ने एक हदीस फरमाई है जिसका तर्जुमा हम आपको बताते हैं हुजुर सल्ला सल्ला वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि इंसान अपने दोस्त के दीन पर चलता है तो तुम यह देख लिया करो कि तुम किसको अपना दोस्त बना रहे हो . दोस्तों इस में रसूलल्लाह सल्ला वाले वसल्लम ने इसी बात की तरफ इशारा किया है कि तुम्हारा दोस्त जैसा होगा वैसे ही तुम भी हो जाओगे क्योंकि इंसान पर उसकी संगत का असर पड़ता है.


इसलिए रसूल अल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि तुम देखकर दोस्त बनाओगे तो किसको तुम अपना दोस्त बना रहे हो . हालांकि यहां पर उनका यह मतलब ये नहीं है कि दोस्त शक्ल से अच्छा होना चाहिए या फिर मालदार होना चाहिए बिल्कुल नहीं . यहां पर दोस्त ऐसा होना चाहिए कि वह अच्छा काम करें क्योंकि हम उसकी संगत में रहकर उसका असर पाके अच्छी चीज इख्तियार करें क्योंकि यह चीज तो जरूरी है कि दोस्त का असर हमारे अंदर जरूर आएगा. रसूलुल्लाह सल्ला सल्ला वाले वसल्लम ने जो बातें 14 सौ साल पहले बता कर चले गए वह बातें आज हम दुनिया में सुनते हैं हमारे नबी ने एक-एक चीज हमें सिखा दिया है कि कैसे हमें अपनी जिंदगी जीना है इस्लाम ने हर एक चीज बताया है सोने से लेकर खाने तक का हर एक तरीका और तहज़ीब इस्लाम ने सिखाया है. नीचे देखें कुरान और हदीस की दलील :

अल क़ुरान : एह ईमान वालों मेरे दुश्मनों और अपने दुश्मनों को दोस्त ना बनाओ , के (तुम तो) उनके पास दोस्ती के पैगाम भेजते हो , हालाँकि तुम्हारे पास जो सच्चा दीन आया उसके ये मुनकीर हैं .
अल क़ुरान, सुरह अल-मुमतहना (60), आयत 1 .
हदीस : अबू सईद खुदरी रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूलअल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया तुम अपने पहले की उम्मतों की एक एक बालिश्त और एक एक गज़ में इत्तेबा (पैरवी) करोगे यहाँ तक की वो किसी गो (Lizard) की सुराख में दाखिल हुए होंगे तो तुम भी उनकी इत्तेबा करोगे हमने पूछा या रसूलअल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम क्या इस से यहूद और नसारा मुराद है तो आप सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया फिर और कौन. (हाँ यही मुराद है)
सही बुखारी, जिल्द 8, 7320.
अबू हुरैरा रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया आदमी अपने दोस्त के दीन पर चलता है इसलिए तुम देख लिया करो की किसको दोस्त बना रहे हो.
सुनन अबू दाऊद, वॉल 3 1405 (हसन).
अब्दुल्लाह बिन मसूद रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाहसलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया इंसान उसके साथ रहेगा जिस से वो मुहब्बत करता है.
सही बुखारी, जिल्द 7 ,6168

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