बलिया के रहने वाले सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात नर्वदेश्वर मिश्र का पार्थिव शरीर गुरुवार की रात उनके पैतृक आवास चंदाडीह के बूढ़ावर गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया।
तिरंगा में लिपटे जवान का शव देख लोगों की आंखें छल-छला गईं। नर्वदेश्वर को नई दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय पर बीते मंगलवार की रात दिल का दौरा पड़ गया। तबियत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार की रात इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। हल्दीरामपुर स्थित घाघरा तट पर पूरे सैनिक सम्मान व वैदिक मंत्रोच्चार के बाद अंत्येष्टि की गई।
देश की रक्षा का सपना संजोए नर्वदेश्वर रामपुर में सेना भर्ती परीक्षा में शामिल हुए। तब वे टीडी कॉलेज बलिया में स्नातक की पढ़ाई कर रहे थे। सेना में भर्ती के बाद उनकी पहली तैनाती अजमेर में हुई। विभिन्न स्थानों पर ड्यूटी के बाद वे मणिपुर के इंफाल में तैनात थे। इन दिनों नई दिल्ली स्थित सेना के मुख्यालय पर उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। पार्थिव शरीर के साथ आए जवानों ने बताया कि मंगलवार की रात ड्यूटी के समय अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। सैनिकों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां बुधवार की रात उनका निधन हो गया।
सेना मुख्यालय पर सैनिकों द्वारा अंतिम विदाई दिए जाने के बाद उनका पार्थिव शरीर हवाई जहाज से वाराणसी लाया गया। गुरुवार की रात तिरंगे में लिपटा शव पहुंचते ही ग्राम में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार को सुबह हल्दी रामपुर स्थित घाघरा तट पर हवलदार शत्रुघ्न सिंह की अगुवाई में उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित किया गया। सैनिकों ने शस्त्र उलटकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। उनके पुत्र दीपक ने मुखाग्नि दी। इस दौरान नर्मदेश्वर मिश्र अमर रहे के नारे लगाए गए।
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