बलियाः यूपी और बिहार के बीच बस चलाने की योजना दम तोड़ती हुई नजर आ रही है। परिवहन विभाग ने बड़ी तैयारी के साथ बसें चलाने की योजना तो बनाई लेकिन सफलता नहीं मिली। क्योंकि भरौली में गंगा नदी पर निर्मित पुल पर लगा लोहे का बैरियर बसों के संचालन में सबसे बड़ा रोड़ा है।
बता दें कि लोगों की सुविधा को देखते हुए 25 सितंबर 2020 को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम और बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अफसरों के बीच बैठक हुई। इस बैठक में दोनों राज्यों के बीच बसों को संचालन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। सूत्रों की मानें तो एक महीने के बाद 25 अक्टूबर 2020 को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की ओर से बसों की समय सारणी और आने-जाने वाले मार्ग का निर्धारण कर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम को सौंप दिया गया।
इस योजना के तहत बलिया से बिहार के लिए 3 मार्गों का संचालय करने की योजना थी। जिसमें बलिया-बक्सर (बिहार) वाया फेफना, चितबड़ागांव भरौली, बलिया-छपरा वाया बैरिया और बलिया-पटना वाया बक्सर व आरा होते हुए संचालन तय किया गया। लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाया और आज भी लोग बलिया-बक्सर और बलिया पटना के बीच बसों के चलने का इंताजर कर रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बिहार के बक्सर और भरौली के बीच गंगा निर्मित वीर कुंवर सिंह सेतु पर लगी लोहे की बैरिकेडिंग के कारण संचालन रुका हुआ है। आज से करीब 8 साल पहले पुल पर बड़े वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए लोहे की बैरिकेडिंग लगा दी गई। इस संबंध में एआरएम राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि बलिया-बक्सर और बलिया-पटना के बीच बस सेवा शुरू करने में भरौली के पास पुल पर लगा लोहे का बैरियर बाधा उत्पन्न कर रहा है। अगर बैरियर नहीं होता तो बस चलाने में कोई दिक्कत नहीं होती।
इसके अलावा बलिया से छपरा तक वाया बैरिया-मांझी होते हुए परिवहन निगम की ओर कुछ दिनों पहले बस सेवा शुरू की गई। हालांकि सवारी नहीं मिलने के बाद बसों का संचालन बंद हो गया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बस के खाली आने-जाने से राजस्व का नुकसान होने लगा।
बलिया से बक्सर की दूरी करीब 35 से 40 किमी है। हालांकि इतनी कम दूरी का किराया निजी वाहन चालक 100 से 120 रुपए तक लेते हैं। अगर इन बसों का संचालन शुरु हो जाए तो लोगों को काफी सुविधा मिलेगी।
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