बलिया। बैरिया में करीब 20 साल पहले हुए बहुचर्चित अनाज घोटाले को लेकर जांच अभी भी जारी है। जहां सोमवार को बयान दर्ज किए गए। 20 साल पुराने कागजात के लिए EOW ने तत्कालीन कोटेदारों, ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी को तलब किया।
बता दें ग्राम पंचायत स्तर के हुए घोटाले की जांच के लिए आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन के अधिकारी बैरिया पहुंचे। बैरिया विकासखंड के विभिन्न ग्राम पंचायतों के कुल 120 प्रधान, सचिव, पदाधिकारियों पर घोटाले का मुकदमा साल 2006 में सीबीसीआईडी ने दर्ज कराया फिर मामले की जांच EOW को सौंप दी गई थी। सोमवार को जांच टीम जब बैरिया थाने में बयान लेने के लिए संबंधितों को तलब किया तो हड़कंप मच गया।
कुछ लोगों ने जांच अधिकारी को बताया कि उनके पास 20 साल पुराने कागजात मौजूद नहीं है, तो कुछ ने कहा कि उठान ही नहीं किया। कुछ कागजात आर्थिक अपराध संगठन के पास जमा भी किए। संदर्भ में आर्थिक अपराध संगठन के जांच अधिकारी निरीक्षक सुनील वर्मा ने बताया कि 2002 में काम के बदले अनाज योजना में प्रति मजदूर को 5 किलो चावल और 23 रुपये नकद भुगतान होना था।
इसमें करोड़ों की हेराफेरी किए जाने पर एफआईआर दर्ज है, जिसकी जांच हो रही है। इसमें कोटेदार ही आरोपी नहीं हैं, बल्कि तत्कालीन डीपीआरओ और मुख्य विकास अधिकारी भी आरोपी बनाए गए हैं। जांच अधिकारी सुनील वर्मा ने बताया कि हमारे बुलावे पर जो लोग नहीं आ रहे हैं। उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस भेजकर वाराणसी कार्यालय पर बुलाया जाएगा।
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