बलिया डेस्क : जाति प्रमाण पत्र को लेकर नौकरी से निष्कासित हुए एसडीएम श्याम बाबू का अब पहली बार इस मामले में बयान आया है. उन्होंने कहा है कि सत्य को परेशान किया का सकता है लेकिन पराजित नहीं किया का सकता है. सिपाही से पीसीएस अधिकारी बने श्याम बाबू ने कहा है कि उन्होंने 15 साल पुलिस विभाग में नौकरी की. इसी वर्ग के साथ.
ऐसे में अब मेरी जाति कैसे बदल सकती है. उन्होंने आगे कहा है कि जाति व्यवसाय को देखकर निर्धारित नही की जा सकती है. उन्होंने कहा कि जाति अभिलेख से निर्धारित की जाती है. उन्होंने आगे कहा कि तत्कालीन ज़िलाधिकारी ने उनकी पड़ताल की थी. बाद इसके उनकी तैनाती की गई थी. उन्होंने आगे कहा कि उनकी सफलता कुछ लोगों को रास नहीं आ रही है. इसलिए उनकी जाति पर सवाल किया जा रहा है.
बता दें की बैरिया के इब्राहिमाबाद उपरवार इलाके के रहने वाले श्याम बाबू 2016 के पी सी एस एग्जाम में पास होकर चर्चा में आये थे. दिलचस्प बात यह थी कि श्याम बाबू उस वक़्त प्रयागराज में सिपासी के पद पर तैनात थे. पीसीएस एग्जाम में श्याम बाबू ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का प्रमाण पत्र लगाया था.
श्याम बाबू ने एसटी का प्रमाण पत्र लगाकर खुद को गोंड जाति का बताया था. लेकिन इसके बाद मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था गोरखपुर के अध्यक्ष विजय बहादुर चौधरी की तरफ से अपील की गयी कि श्याम बाबू के जाति प्रमाण पत्र सत्यापन किया जाए. शिकायतकर्ता का कहना था कि श्याम बाबू ने अपने जाति प्रमाण पत्र में हेरा फेरी की है.
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