फोटो: बांसडीह तहसील
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। यूपी में पांच चरणों का मतदान हो चुका है। 3 मार्च को छठवें चरण का चुनाव होने जा रहा है। छठे चरण में दो सीटों की लड़ाई सबसे बड़ी मानी जा रही है। एक गोरखपुर शहर जहां से स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के उम्मीदवार हैं। तो वहीं दूसरी बहुचर्चित सीट बलिया जिले की बांसडीह है। जहां से आठ बार के विधायक रहे, सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। लेकिन क्या 2017 की भाजपा लहर के बावजूद अपनी सीट बचा लेने वाले रामगोविंद चौधरी इस बार फिर जीत दर्ज कर पाएंगे?
आइए बात करते हैं बांसडीह विधानसभा सीट के पिछले चुनाव परिणामों की। 2012 चुनाव में सपा से रामगोविंद चौधरी 52085 मत पाकर चुनाव जीते। भाजपा से केतकी सिंह 29208 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे। सुभासपा से दीनबंधु शर्मा 28387 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस से बच्चा पाठक 21799 मत पाकर चौथे स्थान पर रहे। जेडीयू से शिव शंकर चौहान 20222 मत पाकर पांचवे स्थान पर रहे।
2017 चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन से रामगोविंद चौधरी 51201 मत पाकर चुनाव जीते। निर्दल प्रत्याशी केतकी सिंह 49514 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहीं। भाजपा-सुभासपा गठबंधन से ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर 40234 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। बसपा से शिव शंकर चौहान 38745 मत पाकर चौथे स्थान पर रहे। निर्दल प्रत्याशी नीरज सिंह गुड्डू 10315 मत पाकर पांचवें स्थान पर रहे।
यहां का चुनाव बहुत ही रोचक बनता जा रहा है। मतदाताओं के साधने के लिए प्रत्याशी हर जोड़-तोड़ की कोशिश में लगे हैं और देखा जा रहा है कि कैसे केवरा प्रधान डॉ. सुरेश प्रजापति सुबह भाजपा सांसद की मौजूदगी में भाजपा जॉइन करते हैं और शाम होते-होते वह सपा जॉइन कर लेते हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेता को शिकस्त देने वाली पूर्व विधायिका विजय लक्ष्मी के साथ सोशल मीडिया पर पिछले दिनों रामगोविंद चौधरी की तस्वीर वायरल हुई। जिसमें बताया जा रहा था कि विजय लक्ष्मी का समर्थन रामगोविंद चौधरी को मिला। लेकिन अगले ही दिन गृह मंत्री अमित शाह की सभा में विजय लक्ष्मी भाजपा में शामिल हो गईं। जिससे चुनाव और भी रोचक होता जा रहा है।
पूर्व विधायिका विजय लक्ष्मी से नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी की मुलाकात
बांसडीह विधानसभा सीटो को लेकर लंबे समय तक भाजपा व निषाद पार्टी में टिकट के लिए चर्चा चलती रही। अंततः यह सीट निषाद पार्टी के खेमे में गई। निषाद पार्टी ने टिकट दिया केतकी सिंह को। केतकी सिंह पिछले चुनाव में निर्दल उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में थी व महज 1687 मत से चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इनकी चर्चा पूरे जनपद में बनी रही। वैसे में इस बार भाजपा गठबंधन उम्मीदवार हैं तो इनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही।
सपा में शामिल होते वक्त केवरा प्रधान की तस्वीर
निषाद पार्टी यहां चुनाव मैदान में है तो बात निषाद मतदाता की करी जाए। इनकी भूमिका यहां महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन जब बात निषादों की आती है तो यहां से एक और उम्मीदवार आते हैं जिनको बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री व सन ऑफ मल्लाह कहलाने वाले मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है। ये हैं अजय शंकर पाण्डेय “कनक”। वैसे तो ये भाजपा+निषाद पार्टी के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे लेकिन टिकट न मिलने पर “नाव” पर सवार हो गए।
केवरा प्रधान भाजपा में शामिल होते हुए
कनक पाण्डेय का दबदबा रेवती नगर पंचायत क्षेत्र में माना जाता है। नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर लगातार दूसरी बार इनके परिवार का कब्जा बना हुआ है। कयास लगाया जा रहा है कि ब्राह्मण मतदाताओं का भी रुझान इनकी तरफ हो सकता है।
जब बात ब्राह्मण मतदाताओं की आती है तो इस सीट पर दो और ब्राह्मण उम्मीदवार आते हैं। एक जो बांसडीह सीट से 7 बार विधायक व मंत्री रहे, शेर-ए-पूर्वांचल कहे जाने वाले नेता स्व0 बच्चा पाठक के पौत्र भी हैं। पुनीत पाठक जो कांग्रेस से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। जिनके समर्थन में प्रियंका गांधी ने रोड शो कर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है।
बांसडीह रोड में कांग्रेस उम्मीदवार पुनीत पाठक के लिए प्रियंका गांधी का रोड शो
वहीं दूसरी तरफ शिक्षा-स्वास्थ्य के मुद्दों पर आम आदमी पार्टी से सुशांत राज पाठक भी चुनाव मैदान में हैं। सपा की बात की जाए तो इस बार सपा और सुभासपा एक साथ चुनाव मैदान में है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि ओमप्रकाश राजभर को देख कर राजभर मतदाता सपा की तरफ ही रुझान कर रहे हैं। लेकिन ऐसे में पूर्व जिला पंचायत सदस्य व सुभासपा की महिला नेत्री रही मालती राजभर बसपा से चुनाव मैदान में अपनी दावेदारी कर रही है। देखना दिलचस्प होगा कि राजभर मतदाता अपना रुख किधर करते हैं।
बात कुछ और चेहरों की करते हैं जो चुनाव मैदान में तो नही हैं लेकिन इस बार के चुनाव में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पूर्व विधायक शिवशंकर चौहान, विधानसभा में इनका अपना एक अच्छा खासा वोट बैंक माना जाता है। भाजपा के टिकट के दावेदार थे, अब भाजपा गठबंधन की प्रत्याशी केतकी सिंह के साथ सभाओं में और जनसम्पर्क करते देखे जा रहे हैं। जिससे भाजपा पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को साधने का प्रयास कर रही है।
पूर्व मंत्री व सुभासपा सुप्रीमो ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर पिछले चुनाव में भाजपा गठबंधन से उम्मीदवार थे। लेकिन अब सपा से गठबंधन में वाराणसी की शिवपुर विधानसभा से चुनाव मैदान में है। पिछले दिनों रामगोविंद चौधरी के समर्थन में सभा कर राजभर मतदाताओं को सपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की।
वहीं दूसरी तरफ पूर्व विधानसभा प्रत्याशी व सहतवार नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि नीरज सिंह गुड्डू जो पिछले चुनाव में पहले सपा के उम्मीदवार बनाए गए, फिर बाद में टिकट कटने पर निर्दल चुनाव मैदान में पूरी ताकत झोंकी। इस बार के चुनाव में वह सपा के साथ मजबूती से नजर आ रहे हैं। जिससे यहां की लड़ाई किसी के लिए बहुत आसान नहीं है।
बलिया ख़बर के लिए ये स्टोरी बलिया के निवासी और छात्र नेता अतुल पांडेय ने लिखी है।
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