बलिया की एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल है। मरीज की स्थिति चाहे सामान्य हो या गंभीर, एंबुलेंस न तो समय पर पहुंचती है और न ही समय पर अस्पताल पहुंचाती हैं। हालत गंभीर होने पर मरीजों को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। ऐसे में जिलेभर में मरीज परेशान हैं।
बता दें कि जिले में मरीजों की सुविधा के लिए निशुल्क एंबुलेंस सेवा संचालित की जा रही है। इसके लिए 76 एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें 38 एंबुलेंस 102 नंबर और 38 एंबुलेंस 108 नंबर की है। इन एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम 11 मिनट तय किया गया है। यानि कि जब मरीज फोन करे तो 11 मिनट में ही एंबुलेंस पहुंचना चाहिए। लेकिन इन नियमों का पालन नहीं हो रहा। 11 मिनट की बजाए एंबुलेंस आधे से एक घंटे से देर से पहुंच रही है। चालक दूर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
हालत बिगड़ने पर मरीज को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। कई बार समय से न पहुंचने के कारण एंबुलेंस में ही प्रसव हो जाते हैं। कई एंबुलेंस तो मरम्मत व रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल हो गई हैं। जिला अस्पताल में कुछ एंबुलेंस को इधर-उधर खड़ा कर छोड़ दिया गया है। धूप, बारिश में वे खुले में सड़ रही हैं। सीएमओ आवास पर कई एंबुलेंस कबाड़ हो चुकी हैं। उनके अधिकांश पार्ट्स गायब हैं या खराब हो चुके हैं।
एम्बुलेंस प्रभारी प्रभाकर यादव ने बताया कि जिला अस्पताल से करीब 12 से 14 मरीज वाराणसी के लिए रेफर होते हैं। वहां 108 एंबुलेंस जाकर 12 घंटे तक फंस जाती है। मरीजों के लिए पास के हनुमानगंज में पांच एंबुलेंस रहती है जिन्हें तत्काल भेज दिया जाता है। वहीं सीएमओ डॉक्टर जयंत कुमार का कहना है कि कई बार हमने देरी से पहुंचने की बात को बैठकों में कहा है। रिस्पांस टाइम का पालन हो, इसके लिए सेवा प्रदाता को पत्र भेजा गया है। हर हाल में समय का पालन होना चाहिए।
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