बलिया। जनपद में एक तरफ बाढ़ तो दूसरी तरफ कटान लोगों के जीवन को दूर भर कर दिया है। गंगा की लहरों ने तो ऐसा ताण्डव किया कि चौबेछपरा एवं श्रीनगरगांव जहाँ गंगा की भेंट चढ़ गए, वहीं केहरपुर गांव को भी गंगाअपने निशाने पर ले लिया है।
स्थिति इतनी भयावह हो गयी है कि लोग अपने सामानों को लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं। उनके आंखों के सामने उनका पुश्तैनी घर व गांव गंगा में विलीन होता गया।
पीड़ित खाली हाथ सुरक्षित स्थानों की तलाश करते रहे। एक समय था कि जब रामगढ़ एनएच से लगभग बना लिया है। चार किलोमीटर अन्दर दक्षिण दिशा में कई गांव आबादी से भरे हुए थे। आज वहाँ गंगा ने अपना रास्ता बना लिया है।
बड़ी दर्दनाक कहानी है इन गाँवों की जहाँ एक समय स्कूल, पोखरा कुआं, भवन, मन्दिर, मैदान, हरा भरा गांव आदि हुआ करते थे। यही नहीं बिजली के खंभे भी रोशनियां बिखेरते थे।
जब कटान पीड़ित एनएच पर स्थित बांध से गंगा के पानी को देखते है तो उनके आँखों से बरबस ही आँखों से आँसू आ जाते है। कई हजार लोगों के गांव तो गए ही जन्मभूमि भी समाप्त हो गई। सबसे ज्यादा ऊपजाऊ जमीन जहाँ फसलें उगा करती थी आज वहाँ गंगा नदी बह रही है।
वर्ष 2001 से गंगा नदी गाँवों के जमीन एवं घरों को अपनी आगोश में लेते हुए धराशायी करती गई। यदि उन गाँवों को याद करें कि जैसे डागंरबाद, शुक्लछपरा मझौवां, पचरुखियां,नारयनपुर,तेलियाटोला, हुकुमछपरा,मीनापुर, दुर्जनपुर शाहपुर, गंगापुर,प्रेमनगर,लालाबगीचा आदि गांव 2010तक समाप्त हो गए। 2016 में जब गंगा ने ताण्डव पुन:मचाना शुरू किया तो चौबेछपरा एवं श्रीनगर को भी अपने चपेट में ले लिया।
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