यूपी में गठबंधन का फॉर्म्युला लगभग तय, बराबर सीटों पर लड़ेंगी बसपा और सपा

उत्तर प्रदेश में 2019 लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए विपक्षी दलों ने गठबंधन को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। माना जा रहा है कि यूपी की 80 लोकसभा सीटों के बंटवारे का फॉर्म्युला इस तरह से तय हुआ है कि एसपी और बीएसपी लगभग बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। वहीं कांग्रेस के गठबंधन में शामिल होने की स्थिति में उन्हें सिर्फ दो सीटें दी जाएंगी। इसके अलावा इस गठबंधन में अजित सिंह की राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) को वेस्ट यूपी में तीन सीटें मिल सकती हैं।
रिपोर्ट्स की मानें तो चुनाव पूर्व बीएसपी और एसपी का गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। इसके साथ यही यह भी कयास लग रहे हैं कि आगामी 15 जनवरी को बीएसपी चीफ मायावती के जन्मदिन पर इसका ऐलान भी हो सकता है। इस गठबंधन में फिलहाल आरएलडी के भी शामिल होने के संकेत हैं। हालांकि कांग्रेस से अभी दोनों पार्टियों ने दूरी बनाई हुई है। पर, माना जा रहा है कि कांग्रेस अगर गठबंंधन में शामिल होती है तो उन्हें गांधी परिवार की दो परंपरागत सीटें रायबरेलीऔर अमेठी दी जा सकती है।

माया के जन्मदिन का निगाहें
बीएसपी प्रमुख मायावती का जन्मदिन 15 जनवरी को है। लोकसभा चुनाव से पहले वह अपना जन्मदिन बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि इसमें कई विपक्षी दलों के नेताओं को भी मंच देकर वह अपनी ताकत दिखा सकती हैं। ऐसे में पूरी संभावना है कि वह इस दिन गठबंधन का ऐलान भी कर सकती हैं। हालांकि कहा जा रहा है कि वह अपने जन्मदिन पर कांग्रेस को छोड़कर बाकी विपक्षी दलों को आमंत्रित करेंगी।


इनकारों ने बढ़ाईं अटकलें

उधर, बीएसपी के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने गठबंधन और बैठक को लेकर आ रही रिपोर्ट्स से साफ इनकार किया है। एआईसीसी प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने भी कहा है कि यूपी में अभी सीटों को लेकर कोई बात शुरू नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जब अभी गठबंधन को लेकर कोई बात नहीं चल रही है तो उसके अंतिमरूप का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, लगातार किए जा रहे इनकारों ने केवल यूपी में ‘महागबंधबंधन’ का आकार क्या होगा, इस पर अटकलों को और बढ़ा दिया है। ऐसा कहा जा रहा है कि मायावती कांग्रेस को ज्यादा सीटें देने की इच्छुक नहीं हैं।

कांग्रेस पर भी दबाव
दोनों पार्टियों ने साथ चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। वे कांग्रेस को अलग रखना चाहती हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में भी वे अलग-अलग चुनाव लड़े थे। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस के उम्मीदवार बीएसपी के प्रत्याशी को सामने कमजोर पड़ेंगें। इधर. कांग्रेस में भी इस बात को लेकर दबाव है कि टुकड़ों में गठबंधन न करें। हालांकि कई लोगों का मानना है कि तीन राज्यों में कांग्रेस को मिली जीत को देखते हुए बीएसपी-एसपी उसे गठबंधन से अलग नहीं करेगी।

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