बलिया में गोंड जनजाति के लोग जाति प्रमाणपत्र की मांग को लेकर पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार के बार-बार के आदेशों के बावजूद जिला और तहसील स्तर पर उनकी मांगों को अनदेखा किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, गोंड और खरवार समुदाय के छात्र-छात्राएं और युवा जाति प्रमाणपत्र के लिए धरने पर हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल खरवार कर्णपुरी के अनुसार, इस मामले में वर्ष के पहले संपूर्ण समाधान दिवस पर जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार को एक पत्र सौंपा गया था।
सदर तहसील द्वारा लिखित रूप में यह आश्वासन दिया गया था कि पात्र लोगों को गोंड अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा, लेकिन जब वे ऑनलाइन आवेदन करते हैं, तो तहसीलदार द्वारा उनके आवेदन निरस्त कर दिए जा रहे हैं।
यह भी बताया जा रहा है कि 2 दिसंबर 2024 को उत्तर प्रदेश समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव ने एक शासनादेश जारी कर 3 नवंबर 2021 के पूर्व आदेशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लेखपाल और तहसीलदार भारत के राजपत्र और संविधान के प्रावधानों की अवहेलना कर रहे हैं।
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन इस मामले में मूकदर्शक बना हुआ है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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